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प्रतिलिपि
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सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के साथ मीडिया साक्षात्कार, 12 भागों का भाग 4

विवरण
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इस एपिसोड में, मास्टर समाचार प्रस्तुत करने में पत्रकारों के महान कर्तव्य पर चर्चा करती हैं।

(गुरुजी, क्या आप इस वर्ष चंद्र नववर्ष यहीं मनाएँगी?) मुझे नहीं पता। (यदि हम चंद्र नववर्ष यहाँ मनाएँ, तो गुरुजी क्या आप हवाई के सांस्कृतिक कार्यक्रम को फिर से प्रस्तुत करवा सकती हैं?) यह तो बहुत अच्छा रहेगा। (यह बहुत अद्भुत होगा!) क्या आप सबको यह पसंद है?

(गुरुजी, आप वीडियोटेप कब जारी करेंगी?) यह इतना आसान नहीं है। (आपने वादा किया था कि…) उन्होंने यह अपने-आप किया था। मैंने उनसे ऐसा करने को नहीं कहा था। वह कार्यक्रम शिष्यों द्वारा तैयार किया गया था।(जी हाँ।) उनमें से कुछ पेशेवर हैं। (जीहाँ।) (बच्चों का प्रदर्शन...) (नहीं, मेरा काम अभी इसे पूरा नहीं हुआ है। मैं काम करने कल वापस आऊँगा।) सुखी परिवार का महत्व है, है न? प्यारा, है न? स्नेहपूर्ण और सुखद, है न? (केंट ने मुझसे पूछा, "क्या आपने कर लिया, डैड?") ओह, ठीक है। तो उन्हें बस बता दीजिए। (वह जानता है आज मैं समाचारपत्र पर काम कर रहा हूँ।) ओह, सच? (तो मैं उस पर काम क्योंनहीं कर रहा?) हे भगवान! सच? क्या वह आवश्यक है? (खैर, मैंने प्रिंटिंग कंपनी से कहा कि मैं कला सुबह वहाँ ले लाऊँगा।) ओह, सच? ठीक है।

(मनोरंजन कार्यक्रम बहुत शानदार था। यदि आप अनुमति दें…) उन्होंने बस उसी समय सहज रूप से कर दिया था। (यदि आप उन्हें यहाँ फिर से प्रदर्शन करने दें, तो बहुत अच्छा होगा— खासकर चंद्र नववर्ष के दौरान।) क्या हमें टिकट बेचने चाहिए? हमारे राहत कार्यों के लिए धन जुटाने हेतु टिकट बेचें? (जी, यह भी हो सकता है।) (बिल्कुल। हम अपने लिए कोई पैसा नहीं रखेंगे, तो चिंता की क्या बात है?) यही तो समस्या है। फिर भी लोग हमेशा की तरह आलोचना करेंगे। मैं अपना ही पैसा लगाती हूँ, फिर भी वे मेरी आलोचना करते हैं। क्या यह अजीब नहीं है? (गुरुजी करडाटा हैं! आप पहले ही यू एस को कर चुका चुकी हैं।) मुझे चुकाना होगा। वरना, मुझे इसकी आवश्यकता नहीं होती। (जब भी अमेरिकी लोग पूछें, आप तुरंत कह सकती हैं, “मैं कर चुकाती हूँ, आप जानते हैं!”) यदि वे मुझसे चुकाने को कहेंगे, तो मैं चुका दूँगी। (जी।) ऐसा नहीं है कि मैं… (आपकी कोई आय नहीं है, तो वे आपसे कर चुकाने को क्यों कहेंगे?) कोई आय नहीं। यह सारा पैसा मैं खुद लगाती हूँ। मेरे पास जितना भी पैसा है, मैं सब लगा देती हूँ।

(गुरुजी, इस वर्ष, अगले वर्ष या भविष्य में कभी, आपको औलाकवासी (वियतनामी) समुदाय के सामने बड़े स्तर पर सार्वजनिक रूप से आना चाहिए।) हे भगवान! (ताकि वे…) किसलिए? (ऐसा नहीं है कि हम दिखावा करना चाहते हैं या ऐसा कुछ।) ओह। (लेकिन बात यह है कि मेरे पास पहले होना चाहिए ताकि हम अपनी गतिविधियां बढ़ा सकें।) लेकिन कुछ दिन पहले मैं सार्वजनिक व्याख्यान देने गई थी। जो आना चाहता था, आ सकता था; जो सुनना चाहता था, सुन सकता था।

(जी, लेकिन इसका व्यापक प्रचार नहीं हुआ था।) (इसका प्रचार नहीं हुआ था। केवल शिष्यों को इसकी जानकारी थी; यह केवल हमारे और गुरुजी के बीच था।) लेकिन यह सभी समाचारपत्रों में छपा था। आप कैसे कह सकते हैं कि इसका प्रचार नहीं हुआ था? कुछ समय पहले, मैंने एक बहुत बड़े सभागार में प्रवचन दिया था। (अनहैम, सही है? ओह, जी हाँ।) (अनहैम।) वहाँ लगभग 7,000 या 8,000 लोग थे। वहाँ औलाकवासी (वियतनामी) लोग भी थें। वहाँ ओलाक (वियतनाम) से लोग थे, और कई लोग टेक्सास और उत्तर की ओर से भी आए थे।) (क्या [विदेश स्थित] ओलाक (वियतनाम) के समाचारपत्रों ने इसे नहीं छापा?) शायद उन्होंने बस इसे प्रकाशित करने की ज़हमत ही नहीं उठाई। हम इसमें क्या कर सकते हैं? (नहीं, क्योंकि…)

(गुरुजी के पास कोई प्रकार का प्रेस दल भी होना चाहिए…) (एक दल होना ही चाहिए जो प्रेस से संपर्क कर सके।) ओह, सचमें? (उन्हें कैसे पता चलेगा यदि कोई उनसे संपर्क नहीं करेगा?) ओह, क्या ऐसा है? (क्योंकि अमेरिका बहुत बड़ा देश है।) (उन्हें कैसे पता चलेगा यदि हम लोगों को नहीं बताते?) ठीक है।

(जैसे जब आपने कुछ छापा, तो रजिस्टर को इसके बारे में पता चल गया। किसी ने उन्हें बताया होगा। ऐसा नहीं है कि वे खुद इनकी खोज करने गए।) ओह, समझी। (उदाहरण के लिए…) क्योंकि उनकी स्थानीय शाखाएँ हैं। (जी। (उदाहरण के लिए, जब पुलिस कहीं किसी चोर को पकड़ती है, तो वह प्रेस को बुलाती है।) हाँ, यह सही है। लगता है, मुझे लगता है यह इसी तरह होता है। तो कोई उनको जानता हो या उनसे संपर्क रखने वाला व्यक्ति उन्हें बताता है। अच्छा, ठीक है। (परम गुरु के पास एक प्रेस सेक्रेटरी होना चाहिए।) ओह, ऐसा है? (उदाहरण के लिए, अभी…) तो आप मेरे कुछ शिष्यों से इसकी ज़िम्मेदारी सँभालने को कह सकते हैं। और कौन करेगा? मुझे नहीं पता होगा इन सब चीजों को कैसे करना है। यह मेरे लिए थोड़ा अधिक है! मुझे इन बातों की जानकारी नहीं है। ठीक है। ऐसा है? प्रेस सेक्रेटरी होना, यह थोड़ा अधिक लगता है? क्या ऐसा नहीं लगेगा कि मैं दिखावा कर रही हूँ?

(यह दिखावा नहीं है। यह बस प्रशासनिक मामला है।) (यह केवल प्रेस को जानकारी देना है ताकि वे उस बारे में लिख सकें।) ओह, सच? ओह, सच? ठीक है, ठीक है। तो ठीक है।मैं उन्हें कल से प्रेस सम्भालने के लिए कहूँगी। (सिर्फ़ लोगों को यह बताने के लिए कि आप क्या कर रही हैं।) ओह, सच। ठीक है। हमें इन सब चीजों के बारे में नहीं पता है। बहुत जटिल है। मैं तो बस यही जानती हूँ कि आध्यात्मिक साधना पर्याप्त है। हर बात इतनी जटिल क्यों होनी चाहिए? एक प्रेस अधिकारी, और फिर बाद में किस तरह का अधिकारी होगा? राजनीतिक, और फिर क्या? सच में? ठीक है। क्योंकि आम तौर पर… (लेकिन गुरुजी के पास केवल धर्म रक्षकों हैं, है न?) ओह! धर्म रक्षकों शिष्यों को अनुशासन में रखने के लिए हैं, बाहरी लोगों को दूर रखने के लिए नहीं। अन्यथा, वे सभी मेरे आस पास भीड़ लगा लेते! वे मेरे हाथ-पाँव पकड़े रहना चाहते हैं।

(लोगों तक बात पहुंचाना वास्तव में आवश्यक है।) अच्छा। ठीक है, ठीक है। सुन रहे हैं? (जी, जी।) आप उन लोगों से बात कीजिए… (जी।) आपने वह सुना, है ना? (जी।) (... )से और अन्य लोगों से बात कीजिए, किसी तरह की प्रेस समिति बनाने के बारे में, ठीक है? (जी।) (अब गुरुजी के पास संपर्क का एक माध्यम है—एक सम्पर्क।) हाँ।(इसलिए अब, जब भी वे किसी चीज के बारे में लिखना चाहते हैं, वे संपर्क कर सकते हैं।) ओह। सच में! कुछ भी हो, तो उन्हें फ़ोन कर देना। औलाकवासी (वियतनामी) लोगों को फ़ोन कर दो, है ना?

(कुछ भी हो, तो एक तरीका फ़ोन करना है; दूसरा तरीका है फैक्स करना…।) (एक तरीका फ़ोन करना है या फैक्स करना उन्हें तुरंत बताने के लिए।) (प्रेस को तुरंत बता दीजिए।) (…) से कहिए कि आपके अनुरोध के अनुसार ऐसी प्रेस समिति बनाए। (जी। यदि कुछ होता है…) (गुरुजी जो भी करती हैं, प्रेस को उसका पता नहीं चलता। लेकिन प्रेस समिति के रूप में हम प्रेस को बता सकते हैं उसके बारे में जो मास्टर ने किया हैं।) (रिपोर्टर से मिलें।) ओह, सच में? (तब हम बात फैला सकते हैं।) ठीक है। (हम तुरंत बात फैला सकते हैं।) (उन्हें अपडेटेड रखने के लिए।) या जब भी आप मुझसे मिलना चाहें, बस आओ और मुझसे मिलो। आपको क्यों… (नहीं, बहुत से लोग हैं…)

आइए प्रेस टीम के माध्यम से जाएँ, तो, ठीक है? (हाँ, और यह बहुत जल्दी होता है। जैसे मास्टर ने कहा: “अब मैं उन रिपोर्टर से मिलना चाहती हूँ जो दूसरे दिन आए थे।”) सच में? तो मैं उनसे तुरंत मिल सकती हूँ? (जी, आप उनसे तुरंत मिल सकती हैं।) हां, अच्छा, ठीक है। तो मैं उस प्रेस समिति के माध्यम से संपर्क करूँगी। (उस प्रेस समिति के माध्यम से संपर्क कीजिए, और रिपोर्टर आकर आपसे तुरंत मिल सकते हैं।) ठीक है। अच्छा। अब जब आपने अनुरोध किया है, तो मुझे पता है और मैं ऐसा कर सकती हूँ।

इससे पहले, मैंने इन बातों के बारे में कभी नहीं सोचा था। एक आध्यात्मिक साधक के रूप में, मुझे इधर-उधर घूमने के बजाय बस पर्वतों में रहकर साधना करनी चाहिए। (प्रेस से क्यों मिलना?) इसी तरह होना चाहिए। प्रेस से क्यों मिलना? (उन सब चीजों में उलझ जाना।) उन सब में क्यों उलझना? (इसमें पड़ना।) लेकिन यह हो चुका था, और मामला बढ़ता ही गया, तो अंततः आप सबको इसका पता चल गया। और अब जब आपको पता चल गया और आप मिलने आए हैं, तो मैं आपको इसके बारे में बता रही हूँ। वास्तव में, आध्यात्मिक साधकों के लिए, बातें इतनी जटिल नहीं होनी चाहिए। (गुरुजी की आध्यात्मिक साधना इतनी प्रसिद्ध हो गई है कि लोग उस पर ध्यान दे रहे हैं।) लेकिन मुझे लगता है कि अब आप लोग अंततः यह करने को तैयार होंगे। पहले, यदि मैं आपको बुलाती, तो कौन सुनने की ज़हमत उठाता?

(लेकिन गुरुजी, क्या आप नहीं देखती, हवाई की आपकी पिछली यात्रा कितनी लाभदायक थी? आप देखती हैं?) (उदाहरण के लिए, यदि कोई आपको किसी समारोह के लिए आमंत्रित करता है आप सीधे वहाँ जा सकते हैं।) अच्छा। सच में? (जैसे आज, गुरुजी में ऊर्जा कम है, फिर भी आप यहाँ बैठकर चाय पर अतिथियों से मिल रही हैं।) अच्छा। सच में? (उन्हें गुरुजी से मिलना ही क्यों है? गुरुजी को आराम करने दीजिए।) ठीक है, ठीक है। मैं समझ गई। (एक संबंध से दूसरा संबंध बना, समझीं गुरुजी? यदि पिछली बार हम हवाई में गुरुजी से न मिले होते, तो आज यह मुलाकात नहीं होती।) हाँ। सच है? (गुरुजी, क्या आपको पता है? आज आपसे मिलने के लिए, हमें कम-से-कम दो सप्ताह पहले से संपर्क करना पड़ा था।) सच में? (यह अभी-अभी तय नहीं हुआ था।) ओह। सच! (जी।) मुझे तो पिछले कुछ दिनों में ही इसका पता चला। (जी। क्योंकि वे…) लगभग तीन या चार दिन पहले, ऐसा कुछ। (वे इसके बारे में लगातार पूछ रहे थे।) (यहाँ पहुँचने से पहले उन्हें भी कई बार संपर्क करना पड़ा।) ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं भी हमेशा यहाँ नहीं रहती। मैं अभी ह्यूस्टन से लौटी हूँ। (जी।) इसलिए मुझसे संपर्क करना भी कठिन है। (हमने (… )से संपर्क किया, लेकिन उन्हें भी पता नहीं था।) ओह। मैं समझी। (तो इस तरह काफ़ी आना जाना चलता रहा। हमें आज सुबह ही पता मिला।) समझी। (सुबह 10:30 बजे।) हाँ। ठीक है। तो आखिर उन्होंने आपको राज़ बता ही दिया, है न? (लेकिन बात यह है कि, यहाँ आने का रास्ता बहुत कठिन है।) यदि शिष्यों को पता चलता है और वे यहँ भीड़ लगा देते हैं, तो हमारा काम तमाम हो जाता।

(लेकिन गुरुजी, क्या आपको पता है? यहाँ आने का रास्ता सचमुच बहुत कठिन है।) हाँ। (हम यहाँ एक बार में आ गए!) फिर भी आप यहाँ पहुँच गए? (हम सीधे आगे बढ़ गए।) और बस यूँ ही, आप आ गए। (और आज तो विशेष रूप से असामान्य था— यातायात जाम नहीं था। कोई बाधा नहीं थी। (न कोई बाधा थी, न यातायात जाम।) (ऐसा पहले कभी नहीं हुआ—यातायात का न होना तो असंभव है।) (आमतौर पर यातायात बहुत खराब होता है।) (आज सचमुच असामान्य है।) चारों ओर चमत्कार ही चमत्कार? (जी।) (मैं सही हूँ। विश्वास करना कठिन है, लेकिन ऐसा सचमुच हुआ।) (विश्वास करना कठिन है, लेकिन सच है।) तो फिर… (नहीं, लेकिन यह सचमुच असाधारण था, गुरुजी।) ठीक है, अब आपको पता चल गया। (ज़रा-सा भी यातायात जाम नहीं था।)

हाँ। अब जब आप प्रेस वालों ने यह अनुरोध किया है, तो अगली बार कुछ हो, उन लोगों को इसके बारे में बता देना, ठीक है? (जी।) मैं इन दोनों को सूचित करूँगी; वे दूसरों को बताने में सहाय कर सकते हैं, और वे लोग बाकी सभी को सूचित करेंगे। इस तरह। यह क्या है? आपको यह लिखना क्यों है? (कोई एक समाचारपत्र खोलिए।) (जी।) आपको बिज़नेस कार्ड की क्या आवश्यकता है? ये समाचारपत्रों इतने प्रसिद्ध हैं— लोग इन्हें कैसे नहीं जानेंगे? ठीक है।

(परम गुरु की तस्वीर छापने के बाद यह प्रसिद्ध हो गया।) सच में? (जी। गुरुजी, क्या आपको लगता है पुस्तक की छपाई ठीक है?) हूह? (वियतनाम पोस्ट द्वारा छापा गया।) आह! यह बहुत अच्छा है! वाह, यह तो बहुत बड़ा है! यह बहुत सुंदर लग रहा है। (श्याम-श्वेत अंक।) पिछला अंक, और फिर अगला—माफ़ीनामा वाला अंक, है न? (पिछला अंक बहुत अच्छा नहीं दिखा था।) सच में? (पिछला अंक बहुत जल्दबाज़ी में तैयार किया गया था।) यह कितना बड़ा है, कितना बड़ा! और यह पहले पृष्ठ पर भी था? इसमें बहुत खर्च आया होगा, है न? मुझे संकोच हो रहा है। मुझे बहुत संकोच हो रहा है। मुझे बहुत ही संकोच हो रहा है, बहुत संकोच!

(वियतनाम प्रेस अब बहुत प्रसिद्ध है।) उन्हें पैसे भेजने को कहिए, फिर हम और प्रतियाँ छापेंगे। जब बात निकली ही है, तो मैं इसका उल्लेख कर देती हूँ। (6,000 प्रतियाँ।) उन्होंने सभी प्रतियाँ छापीं और मुफ़्त बाँट दीं। आह! छह हज़ार प्रतियाँ छापने में कितना खर्च आता है? (6,000 प्रतियाँ।) अब कितना खर्च आता है? (हमारे समाचारपत्र की 6,000 प्रतियों का? लगभग 1,600 या 1,700, गुरुजी।) सच में? (जी। लगभग 1,700।) आह। (यदि इसकी रंगीन छपाई हो, तो और अधिक खर्च आता है, गुरुजी।) ओह, सच में? (यदि यह रंगीन हो, जैसे वियतनाम पोस्ट का हालिया अंक, तो और अधिक खर्च आता है।) ओह, सच में? (जी।) यदि किसी को और प्रतियाँ चाहिए, तो बाद में मैं… और छपवा दूँगी। यदि किसी को और प्रतियाँ चाहिए, तो मैं उन्हें छापने के लिए पैसे दूँगी और प्रतियाँ उन्हें दे दूँगी।

यह समाचारपत्र मुफ़्त है, या आप इसे बेचते हैं? (यह मुफ़्त समाचारपत्र है— हम इसे लोगों को मुफ़्त देते हैं। लेकिन अब औलाकवासी (वियतनामी) लोगों के मामले में, गुरुजी, बात ऐसी है। यदि हम समाचारपत्र की कीमत 25 सेंट रखें—सिर्फ़ लगभग 25 सेंट, वे एक बार देखेंगे और चले जायेंगे।) यह केवल 25 सेंट का है, फिर भी वे इसे नहीं खरीदेंगे। (लेकिन अगर हम इसे मुफ्त में देते हैं, वे पूरा ढेर उठा लेंगे!) बिल्कुल। (और फिर उसे घर ले जाते हैं।) (यदि आप इसे मुफ़्त दें, तो वे ले जाएँगे।)

(रंगीन छपाई मुश्किल होती है; उसे प्रेस से चार पाँच बार गुज़ारना पड़ता है।) सही है। (रंगों को अलग करना पड़ता है, गुरुजी।) मैं जानती हूँ, जानती हूँ। (थकाऊ है।) बहुत थकाऊ। (इसीलिए मुखपृष्ठ तैयार करते समय हमें रात में वहीं बैठना पड़ा— यह देखने के लिए कि छपाई का तालमेल न बिगड़े।) हे भगवान। (हम ऐसा नहीं कर सकते हैं कि मास्टर की तस्वीर में चार आंखें हों।) मावड़ी केवल तीन आँखें हैं! (कभी कभी, हम देर रात तक जागते हैं बस काम पूरा करने, और उसे ख़त्म करने के लिए।) मैं समझती हूँ। (अगर हम अगली सुबह तक समाचारपत्र लेने तक छोड़ देते हैं, तो इसमें सचमुच हमारा बहुत समय लग जाता है।) मेरे साथ भी ऐसा ही है। कभी-कभी मैं रातभर काम करती हूँ। (जी।) मैं काम पूरा होने से पहले आराम नहीं करती। (हमें इसे पूरा करना ही पड़ता है, वरना हम चैन से सो नहीं सकते।) बिल्कुल। (समाचारपत्र प्रकाशित करना बहुत कठिन काम है, गुरुजी।) यह सचमुच बहुत कठिन काम है, है न? (यह सचमुच बहुत कठिन काम है, गुरुजी।) सच? (यह प्रारब्ध कर्म होगा।) रेशम के कीड़े जैसा काम है, है न?

(लेकिन अभी, उदाहरण के लिए, गुरुजी के बारे में लेख लिखना अन्य विषयों पर लिखने से अधिक कठिन है। सबसे पहले, हमें बहुत ध्यानपूर्वक विचार करना होगा, ताकि गुरुजी की ओर से, आप भी हम जो लिखे उस से सहमत हों। और पाठकों की दृष्टि से भी हमें ध्यान रखना होता है कि वे असहज न हों, क्योंकि हमारी लिखी बात उनके दृष्टिकोण के अनुरूप हो भी सकती है और नहीं भी।) ओह! हाँ। (और हमारे पास इसका स्पष्ट प्रमाण है।) (क्योंकि जनता के दृष्टिकोण से…) यहीं तो कठिनाई होती है।) हाँ। (अब अधिकांश लोग गुरुजी पर ध्यान दे रहे हैं, इसलिए वे आपके बारे में लिखे लेखों को लेकर बहुत उत्सुक रहते हैं। (उन्हें वे पढ़ना अच्छा लगता है।) हाँ, हाँ। वह सही है। हमें उन्हें सत्य बताना होगा। (लेकिन फिर तमाम कहानियाँ भी जो वे गढ़ते हैं।) और कोई मुझे एक पैसा भी नहीं देता।

(लेकिन गुरुजी, आप देखिए, जब कुछ अच्छा होता है, तो प्रशंसा उतनी तेज़ी से नहीं फैलती जितनी आलोचना और बुरी बातें। हमेशा ऐसा ही होता है… यही जीवन है।) पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे जनता को थोड़ा शिक्षित करें, और उन्हें अच्छाई तथा अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर ले जाएँ। वरना यदि कोई दूसरों की चुगली या आलोचना करता है, तो वह नकारात्मकता बोलने वाले को भी प्रभावित करती है। इसीलिए औलाकवासी (वियतनामी)कहावत है, “किसी पर खून थूकने से अपना ही मुँह दागदार होता है।” (जी।) बिल्कुल! यह अपना ही मुँह दागदार करता है।

(निश्चित रूप से, इससे वाणी के ज़रिए कर्म बनता है।) सही। हाँ। इसलिए हमें जनता को शिक्षित करने में भी योगदान देना चाहिए। विशेषकर बच्चों, युवानों को— हमें उन्हें अधिक महान मार्ग की ओर ले जाना चाहिए। (जी।)

यही है पत्रकारों का कर्तव्य। प्रेस लोगों को शिक्षित करने के सर्वोत्तम साधनों में से एक है। फिर टेलीविज़न और रेडियो हैं। ये माध्यमो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हमें इस तरह लिखना चाहिए कि समाज को उत्तरोत्तर बेहतर, अधिक शुद्ध और महान बनने में सहाय करे। यदि प्रेस यह ज़िम्मेदारी नहीं निभाएगा, तो कौन निभाएगा? विद्यालयों में वे केवल एक सीमित समूह को ही पढ़ा सकते हैं, समझे आप? लेकिन प्रेस व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचता है।

(मैं हवाई से गुरुजी का अनुसरण करता हूँ, लेकिन अब तक आपके साथ मेरी एक भी तस्वीर नहीं ली गई। मैं केवल दूसरों की तस्वीरें लेता रहा हूँ।) आह! सच? ठीक है, तस्वीर ले लीजिए। इनमें से किसी को आपकी तस्वीर लेने को कहिए। इन सबकी तस्वीर लीजिए मेरे साथ। उन्हें गुरुजी के साथ तस्वीरें खिंचवाना पसंद है। यह स्वचालित है। इसे केवल एक बार दबाना और वह पर्याप्त है। समझे? आह, आपकी अंग्रेज़ी बहुत अच्छी है! आपकी अंग्रेज़ी बेहतर हो रही है। (तस्वीर के लिए गुरुजी के पास खड़े हो जाइए।) हाँ। ठीक है। उस दिन आपने तस्वीर नहीं ली थी? (अभी नहीं, उस दिन से तो नहीं।) (मैं पूरे समय बस कैमरे को इस तरह पकड़ा हुआ हूँ।) (वह पहले ही बहुत है। एक समय था जब मैंने मास्टर के साथ बहुत सी तस्वीरें ली।)) हवाई में उस दिन, जब हमने एक साथ भोजन किया। (हवाई में और वैकिकी में।) (आप बटन दबाने में इतना समय क्यों ले रहे हो?) इसे ओर थोड़ी देर दबाए रखिए। (इसे ओर थोड़ी देर दबाए रखिए।) तुम इनके लिए तस्वीर लो। क्या तुम तस्वीर में पाँचों लोगों को ले रहे हो? थोड़ा पीछे हटो। (तो हम गुरुजी के पीछे खड़े हो जाते हैं।) ठीक है। ऐसे भी चलेगा। बस सहज रहिए। आराम से रहिए। ठीक है। आप वहाँ बैठिए। आप स्वयं को जैसे चाहें व्यवस्था करें वह अच्छा है। कोई समस्या नहीं। (इसे ओर थोड़ी देर दबाए रखिए। दबाइए…) इसे ओर थोड़ी देर दबाए रखिए, फिर फ़्लैश… (दबाइए—ओर थोड़ी देर दबाए रखिए, फिर फ़्लैश चलेगा।) यदि तस्वीरे नहीं आती हैं, तो हम अगली बार फिर से ले सकते हैं। (नहीं, इसे ओर थोड़ी देर दबाए रखिए; फिर यह चल जाएगा। इसे ज़ोरसे दबाइए।) इसे दबाकर कुछ देर नीचे पकड़े रखिए। देखा? हे भगवान! नौसिखिया… (बहुत नौसिखिया।) ठीक है। ठीक है। यह वाला काफ़ी मज़बूत दिखता है, है न? यह गंभीर पेशेवर उपकरण है। क्या आप इससे तस्वीर लेना चाहते हैं? (पेशेवर।) पेशेवर है, है न? (दूर की यात्रा के लिए यह बहुत सुविधाजनक है।) आह, सही, सही। (इसे साथ ले जाना आसान है। जी।) वरना, सामान अधिक हो, तो वह बस बोझ बन जाता है। (जी।) बहुत थकाऊ है।

ठीक है, क्या आपके और प्रश्न हैं? और कोई कठिन प्रश्न? बेचारे। वैसे एक ओर जनमत है… दो पाटों के बीच फँसे हैं, है न? यदि आपकी बात पाठकों को पसंद न आए, तो वे समाचारपत्र नहीं खरीदेंगे, उसे पढ़ने की फिक्र भी नहीं करेंगे, और आपका समर्थन नहीं करेंगे। (जी, यह सही है।) (वे हमारा समर्थन नहीं करते।) लेकिन फिर, यदि आप साफ़-साफ़ कहें— “सच्ची बात कानों को चुभती है,” है न? (हम पत्रकार हैं— हम समाचारपत्र चलाते हैं। खैर, यह व्यवसाय है। (हम समाचारपत्र चलाते हैं; हम ही जो इसे छापते हैं।) आप साहसी हैं, है ना? (यदि हम यह नहीं कर पाए, तो इसे बंद कर देंगे।) साहसी हैं, सचमुच में? (हमने इसे स्वयं शुरू किया, और स्वयं ही छापते हैं।) ओह, सही। इसी कारण यह कठिन हो जाता है। (ऐसा तो है नहीं कि वे पैसा लगा रहे हैं।) (ऐसा भी नहीं कि वे हमें कुछ दे रहे हैं।) ओह, सच में? लेकिन विज्ञापन की फीस का क्या? क्या वे विज्ञापन छापने के लिए आपको भुगतान नहीं करते?

(यदि वे विज्ञापन देते हैं, तो उन्हें हमें भुगतान करना पड़ता है।) अच्छा, ऐसा है? (लेकिन यदि वे अब विज्ञापन न दें, तो हम… गुरुजी वह कहावत जानती हैं, “उस व्यक्ति के बिना भी बाज़ार में भीड़ रहती है।”) ओह, सच? (एक व्यक्ति चला जाता है, दूसरा आ जाता है।) (जी, इसलिए हम अपना काम करते रहते हैं।) (डरने की कोई बात नहीं है।) ठीक है। हमें नहीं पता अगर वे हमारे साथ है या दुश्मन के साथ हैं, है ना? ठीक है। (कौन जाने? शायद किसी दिन गुरुजी का कोई शिष्य आकर कहे, “मैं विज्ञापन देना चाहता हूँ।) यह बहुत अच्छा है।

Photo Caption: "सृष्टि के मुकुट के चरणों को सुगन्धित करना सम्मान की बात है"

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